(शहजाद अली हरिद्वार) हरिद्वार।धर्मनगरी हरिद्वार में इन दिनों कांवड़ यात्रा कापावन उत्सव अपने चरम पर है। देशभर से करोड़ों की संख्या में शिवभक्त गंगा जल लेने हरिद्वार पहुंच रहे हैं।
आस्था, श्रद्धा और भक्ति से ओतप्रोत इस माहौल में आज एक विशेष दृश्य तब देखने को मिला, जब उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान हरिद्वार सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत ने स्वयं सड़क पर उतरकर शिवभक्तों का स्वागत किया।
उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर कांवड़ियों पर पुष्पवर्षा की और उन्हें फल वितरित किए।
इस अवसर पर जगह-जगह भक्ति संगीत की गूंज, हर-हर महादेव के जयकारों और ढोल-नगाड़ों की थाप ने माहौल को भक्तिमय बना दिया। शिवभक्तों ने भी त्रिवेंद्र सिंह रावत के इस gesture का जोरदार स्वागत किया।
सेवा भाव से ओतप्रोत इस पहल में रावत स्वयं कांवड़ियों के बीच जाकर उनकी कुशलक्षेम पूछते नजर आए।
उन्होंने कई स्थानों पर रुककर स्वयं अपने हाथों से कांवड़ियों को फल, पानी और जरूरी सामान वितरित किए।
मीडिया से बात करते हुए त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि कांवड़ यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि उत्तर भारत की सांस्कृतिक पहचान है। यह पर्व शिवभक्ति, समर्पण और अनुशासन का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि इन श्रद्धालुओं की सेवा कर स्वयं को सौभाग्यशाली महसूस कर रहे हैं।
“कांवड़ियों की सेवा करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है,” उन्होंने कहा।
रावत ने यह भी बताया कि सरकार और स्थानीय प्रशासन ने यात्रा के दौरान कांवड़ियों की सुरक्षा, स्वास्थ्य और मूलभूत सुविधाओं के लिए व्यापक व्यवस्था की है।
हाईवे पर मेडिकल कैंप, रिफ्रेशमेंट प्वाइंट, मोबाइल टॉयलेट्स और जलपान की व्यवस्थाएं की गई हैं। उन्होंने प्रशासन के अधिकारियों और स्वयंसेवी संस्थाओं की भी प्रशंसा की जो इस आयोजन को सफल बनाने में जुटे हैं।
पूर्व मुख्यमंत्री ने जनता से भी अपील की कि सभी लोग कांवड़ियों का सम्मान करें, उन्हें सहूलियत दें और अपने स्तर पर सेवा के इस पुण्य अवसर में भाग लें। उन्होंने युवाओं को भी आह्वान किया कि ऐसे आयोजनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें, जिससे उनमें सेवा, अनुशासन और संस्कार की भावना विकसित हो।
त्रिवेंद्र सिंह रावत के इस सेवाभावी कदम की न केवल भाजपा कार्यकर्ताओं ने सराहना की, बल्कि आमजन और शिवभक्तों ने भी इसे एक प्रेरणादायक उदाहरण बताया।
इस तरह हरिद्वार की धरती पर आज न केवल आस्था का संगम देखने को मिला, बल्कि जनसेवा और धार्मिकता का सुंदर समन्वय भी दिखाई दिया।
इस आयोजन ने यह सिद्ध किया कि जब जनप्रतिनिधि खुद धरातल पर उतरकर समाज के साथ खड़े होते हैं, तो एक सकारात्मक संदेश पूरे समाज में जाता है।
रावत का यह सेवा भाव निश्चित ही आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा।













































