(शहजाद अली हरिद्वार) उत्तराखंड। “डिजिटल अरेस्ट” जैसा कोई प्रावधान भारतीय कानून में नहीं है। साइबर ठग आजकल आम लोगों को डरा-धमकाकर ठगी का शिकार बना रहे हैं। वे खुद को सरकारी एजेंसी या पुलिस अधिकारी बताकर कहते हैं कि आपके खिलाफ कोई डिजिटल मामला दर्ज है और आपको “डिजिटल रूप से गिरफ्तार” किया जा रहा है। ऐसा दावा पूरी तरह फर्जी और गैरकानूनी है।
अगर आपको कोई ऐसा कॉल आए जिसमें कहा जाए कि आपकी डिजिटल गिरफ्तारी हो रही है, तो घबराएँ नहीं। यह केवल डर फैलाकर पैसा वसूलने का हथकंडा है। ऐसे मामलों में सावधानी बरतें, किसी को OTP, बैंक जानकारी या व्यक्तिगत विवरण न दें। तुरंत अपने नजदीकी थाने या साइबर क्राइम सेल को सूचना दें।
सरकार और पुलिस विभाग कभी भी इस तरह की कार्रवाई फोन पर नहीं करते। जागरूक बनें, सतर्क रहें और दूसरों को भी इस तरह की ठगी से बचाएँ।
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