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BIG BREAKING:: आईआईटी रुड़की का बड़ा कदम! त्रिपुरा की 500 महिला बुनकरों की बदलेगी तकदीर, हथकरघा कारोबार को नई उड़ान देने के लिए हुआ ऐतिहासिक समझौता

(शहजाद अली हरिद्वार)रुड़की। त्रिपुरा में महिलाओं के नेतृत्व वाले हथकरघा उद्यमों को सशक्त बनाने और पारंपरिक हथकरघा क्षेत्र को पुनर्जीवित करने की दिशा में आज त्रिपुरा ग्रामीण आजीविका मिशन और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान रुड़की (आईआईटी रुड़की) के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के साथ एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया।

समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के अवसर पर श्री अभिषेक सिंह, सचिव, ग्रामीण विकास विभाग, त्रिपुरा सरकार, तथा प्रो. ए. के. शर्मा, प्रमुख, डिज़ाइन विभाग, आईआईटी रुड़की उपस्थित रहे। समझौते पर श्री तरित कांति चकमा, मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रो. बिभूति रंजन भट्टाचार्य, डिज़ाइन विभाग, आईआईटी रुड़की ने हस्ताक्षर किए। तीन वर्ष की इस साझेदारी का उद्देश्य उत्तर त्रिपुरा, उनाकोटी और धलाई जिलों की 500 महिला स्वयं सहायता समूह बुनकरों को सशक्त बनाना है। इसके लिए प्रौद्योगिकी, डिज़ाइन नवाचार, कौशल विकास, ब्रांडिंग, उद्यमिता और डिजिटल बाज़ार तक पहुँच को एकीकृत किया जाएगा, ताकि त्रिपुरा के पारंपरिक हथकरघा क्षेत्र को एक टिकाऊ, विस्तार योग्य और बाज़ारोन्मुख आजीविका तंत्र में परिवर्तित किया जा सके।

इस अवसर पर अभिषेक सिंह, सचिव, ग्रामीण विकास विभाग, त्रिपुरा सरकार ने अनुसंधान और नवाचार को प्रयोगशालाओं से आगे ले जाने तथा समुदायों के लिए उनके प्रभावी रूपांतरण को सुनिश्चित करने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने वास्तविक चुनौतियों का समाधान करने और सामाजिक विकास में सार्थक योगदान देने के लिए ‘प्रयोगशाला से क्षेत्र तक’ अनुप्रयुक्त अनुसंधान की आवश्यकता पर बल दिया।

प्रो. ए. के. शर्मा, प्रमुख, डिज़ाइन विभाग, आईआईटी रुड़की ने विकासात्मक पहलों और समुदायों के साथ जुड़कर सार्थक एवं टिकाऊ प्रभाव उत्पन्न करने के आईआईटी रुड़की के दृष्टिकोण को रेखांकित किया। उन्होंने टिकाऊ ग्रामीण विकास और आजीविका संवर्धन में डिज़ाइन, प्रौद्योगिकी और बहुविषयक ज्ञान की क्षमता पर बल दिया।

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श्री तरित कांति चकमा, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, TRLM ने ग्रामीण समुदायों तक ज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार पहुँचाने के लिए प्रतिष्ठित शैक्षणिक एवं तकनीकी संस्थानों के साथ सहयोग स्थापित करने की मिशन की हालिया पहलों को रेखांकित किया। उन्होंने जमीनी स्तर पर नए अवसर सृजित करने और आजीविका में सुधार लाने के लिए संस्थागत साझेदारियों को मजबूत करने के महत्व पर जोर दिया।

यह सहयोग डिज़ाइन, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में आईआईटी रुड़की की विशेषज्ञता को TRLM के ग्रामीण समुदायों और महिलाओं के नेतृत्व वाले स्वयं सहायता समूहों के व्यापक नेटवर्क के साथ जोड़ता है, ताकि त्रिपुरा के हथकरघा क्षेत्र को सुदृढ़ किया जा सके। पारंपरिक शिल्प कौशल को समकालीन डिज़ाइन और व्यावसायिक प्रक्रियाओं के साथ एकीकृत करके इस पहल का उद्देश्य उत्पादकता, उत्पादों के मूल्य और बाज़ार तक पहुँच को बढ़ाना है। साथ ही, डिज़ाइन-आधारित और प्रौद्योगिकी-सक्षम हस्तक्षेपों के माध्यम से महिला उद्यमिता, टिकाऊ आजीविका और आय के बेहतर अवसरों को बढ़ावा देते हुए एक सुदृढ़ हथकरघा मूल्य शृंखला विकसित करना है।

समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर समारोह में प्रो. सौरव अरोड़ा, प्रो. कल्पक के. कुलकर्णी तथा त्रिपुरा के विभिन्न जिलों का प्रतिनिधित्व करने वाले TRLM के अधिकारियों ने भाग लिया। यह साझेदारी समावेशी नवाचार, महिला-नेतृत्व वाली उद्यमिता और टिकाऊ ग्रामीण विकास के प्रति आईआईटी रुड़की तथा TRLM की साझा प्रतिबद्धता को और मजबूत करती है। साथ ही, डिज़ाइन-आधारित नवाचार और उद्यम विकास के माध्यम से त्रिपुरा की समृद्ध हथकरघा विरासत को समकालीन बाज़ारों तक पहुँचाने के नए मार्ग प्रशस्त करती है।

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