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“हरिद्वार पुलिस की तकनीकी महारत से मिली बड़ी सफलता – ₹40 लाख से अधिक के 300 मोबाइल बरामद, बिहार-महाराष्ट्र तक फैली खोज ने लौटाई लोगों की मुस्कान”

(शहजाद अली हरिद्वार)हरिद्वार पुलिस ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि वह केवल अपराधियों की धरपकड़ में ही नहीं, बल्कि आम जनता की छोटी-बड़ी समस्याओं के समाधान में भी पूरी तरह से तत्पर और सक्षम है। मोबाइल फोन आज की जीवनशैली का एक अभिन्न हिस्सा बन चुका है, और इसका खो जाना आम आदमी के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन सकता है। ऐसे में जब पुलिस खोए हुए मोबाइलों को ढूंढकर उनके असली स्वामियों तक पहुंचाती है, तो यह न केवल एक तकनीकी सफलता होती है, बल्कि सामाजिक विश्वास को भी सशक्त करती है।1 जुलाई 2025 को हरिद्वार के रोशनाबाद पुलिस कार्यालय स्थित कॉन्फ्रेंस हॉल में एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें एसएसपी प्रमेन्द्र सिंह डोबाल के नेतृत्व में हरिद्वार पुलिस द्वारा रिकवर किए गए 300 से अधिक मोबाइल फोन उनके असली मालिकों को सौंपे गए। इन सभी मोबाइल फोनों की कुल बाजार कीमत ₹40 लाख से अधिक आंकी गई है। यह उपलब्धि हरिद्वार पुलिस के सशक्त साइबर सेल और उसके तकनीकी समर्पण का जीवंत उदाहरण है।

तकनीक और निगरानी से मिली सफलता

इस पूरे अभियान में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई C.E.I.R. (Central Equipment Identity Register) पोर्टल ने, जो भारत सरकार की एक पहल है, जिसमें खोए या चोरी हुए मोबाइल फोनों को ट्रैक किया जा सकता है। साइबर सेल हरिद्वार ने इस पोर्टल पर प्राप्त जानकारी के आधार पर, साथ ही सर्विलांस तकनीकों और विभिन्न थानों के समन्वय से देश के कई राज्यों – उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पंजाब, बिहार, गुजरात और महाराष्ट्र – तक फैले मोबाइल नेटवर्क को खंगाल कर इन उपकरणों को रिकवर किया।इस पूरी प्रक्रिया में न केवल टेक्नोलॉजी का कुशल प्रयोग हुआ, बल्कि हरिद्वार पुलिस की टीमों द्वारा लगातार और सघन फील्ड वर्क किया गया। प्रत्येक मोबाइल के IMEI नंबर के आधार पर उसका पता लगाना और फिर संबंधित स्थान से उसे कब्जे में लेना एक जटिल प्रक्रिया होती है। यह सब कार्य महीनों की मेहनत, सटीक योजना और प्रतिबद्धता का परिणाम है।

भावनात्मक क्षण

कार्यक्रम के दौरान जब मोबाइल फोन उनके असली मालिकों को सौंपे गए, तो कई लोगों की आंखों में खुशी के आंसू थे। कुछ लोगों ने कहा कि उन्हें उम्मीद ही नहीं थी कि उनका खोया हुआ मोबाइल कभी वापस मिल पाएगा। यह केवल एक मोबाइल ही नहीं था, उसमें उनकी महत्वपूर्ण जानकारी, फोटो, निजी डाटा और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी कई जरूरी चीजें थीं।एक वृद्ध महिला ने भावुक होकर कहा, “मेरे पोते की पहली तस्वीर उस फोन में थी, जो खो गया था। मुझे लगता था, अब वो यादें नहीं मिलेंगी। लेकिन पुलिस ने वो फोन मुझे वापस दिलाकर मेरे जीवन का अनमोल पल लौटा दिया।”

विगत उपलब्धियाँ और भविष्य की रणनीति

हरिद्वार पुलिस की यह पहल कोई पहली बार नहीं हुई है। वर्ष 2024 में भी पुलिस द्वारा 668 मोबाइल फोन खोजकर उनके असली स्वामियों को सौंपे गए थे। यह लगातार दूसरा वर्ष है जब पुलिस ने बड़ी संख्या में मोबाइल रिकवर किए हैं, जिससे यह साबित होता है कि जनहित के मामलों में हरिद्वार पुलिस पूरी तरह सजग और सक्षम है।एसएसपी प्रमेन्द्र सिंह डोबाल ने कार्यक्रम के दौरान कहा, “हमारी प्राथमिकता सिर्फ अपराध नियंत्रण नहीं है, बल्कि नागरिकों को राहत देना और उनकी समस्याओं का समाधान करना भी है।

खोए हुए मोबाइल की बरामदगी आम जनता का भरोसा जीतने की दिशा में एक मजबूत कदम है।”

उन्होंने बताया कि भविष्य में पुलिस और अधिक उन्नत तकनीकों का इस्तेमाल करेगी, जैसे कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा एनालिटिक्स, ताकि चोरी या गुम हुए मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल अपराधों की पहचान और समाधान और भी तेज़ी से हो सके।

समाज में संदेश

हरिद्वार पुलिस की इस पहल ने समाज में एक सकारात्मक संदेश दिया है — कि पुलिस जनता की समस्याओं को गंभीरता से लेती है और उन्हें हल करने के लिए तकनीक व मेहनत दोनों का सही इस्तेमाल कर रही है।

यह एक उदाहरण है कि अगर आम नागरिक जागरूक होकर सही तरीके से शिकायत करता है, तो प्रशासन भी उसका साथ देने में कोई कसर नहीं छोड़ता।

हरिद्वार पुलिस का यह ऑलराउंडर परफॉर्मेंस निश्चित ही अन्य जिलों और राज्यों की पुलिस के लिए भी प्रेरणा बनेगा। वर्सटाइल कप्तान प्रमेन्द्र सिंह डोबाल के नेतृत्व में साइबर क्राइम से लेकर जमीनी स्तर की शिकायतों तक जिस तरह से हरिद्वार पुलिस काम कर रही है, वह निश्चित रूप से “स्मार्ट पुलिसिंग” की ओर एक मजबूत कदम है।

〽️ निष्कर्ष:
हरिद्वार पुलिस ने यह सिद्ध कर दिया है कि तकनीक और निष्ठा के सही मेल से असंभव भी संभव किया जा सकता है। इस पहल से न केवल मोबाइल स्वामियों को राहत मिली है, बल्कि यह पुलिस और समाज के बीच भरोसे की डोर को और मजबूत करने का कार्य भी कर रही है।

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