(शहजाद अली हरिद्वार)हरिद्वार।भारतीय किसान यूनियन द्वारा हरिद्वार में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय चिंतन शिविर का आज दूसरा दिन रहा।
शिविर में देश के विभिन्न राज्यों से भारी संख्या में किसान पहुंचे और कृषि से जुड़े मुद्दों पर खुलकर विचार साझा किए। किसानों ने एक स्वर में कहा कि सरकार लगातार किसानों की अनदेखी कर रही है और अब समय आ गया है कि देश के किसान संगठित होकर अपने अधिकारों की लड़ाई को और तेज करें।
इस मौके पर किसानों ने हरिद्वार सिटी मजिस्ट्रेट के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय कृषि मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में किसानों ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी, कृषि ऋण माफी, बिजली दरों में कटौती, सिंचाई सुविधाएं, बीमा योजना में पारदर्शिता और फसल का उचित मूल्य सुनिश्चित करने जैसी प्रमुख मांगें रखीं।
राष्ट्रीय चिंतन शिविर की अगुवाई कर रहे भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने अपने संबोधन में केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “केंद्र सरकार को सत्ता में आए 11 साल हो चुके हैं,
लेकिन किसानों की मूल समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। आज हम इन 11 सालों और अपने 11 सवालों पर विचार कर रहे हैं। यदि जरूरत पड़ी तो किसान सड़कों पर उतरेंगे और एक बार फिर बड़ा आंदोलन किया जाएगा।”
राकेश टिकैत ने यह भी कहा कि अब समय आ गया है कि देशभर के सभी किसान संगठन एक मंच पर आएं और साझा रणनीति बनाकर सरकार तक अपनी आवाज मजबूती से पहुंचाएं।
उन्होंने किसानों को संगठित रहने और सरकार की नीतियों पर सतर्क दृष्टि बनाए रखने की अपील की।
शिविर में विभिन्न राज्यों से आए किसान प्रतिनिधियों ने भी अपने अनुभव साझा किए और क्षेत्रीय समस्याओं को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने कृषि नीति में व्यापक सुधारों की मांग करते हुए कहा कि जब तक किसानों को उनकी उपज का वाजिब मूल्य नहीं मिलेगा, तब तक देश की अर्थव्यवस्था भी सशक्त नहीं हो सकती।
शिविर का तीसरा और अंतिम दिन कल आयोजित किया जाएगा, जिसमें भावी रणनीति पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।


























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