न्यूज़ फ्लैश
BIG BREAKING:: बुजुर्ग महिला से अनाथ मेधावी बच्चे तक की जरूरतों को मिला सम्मान, टिहरी की GPDP को सिल्वर SKOCH अवॉर्ड, डॉ. मोहम्मद मुस्तफा खान की पहल बनी मिसाल BIG BREAKING:: लेखक गांव में अंतर्राष्ट्रीय साहित्य, संस्कृति एवं कला महोत्सव का भव्य शुभारंभ, राज्यपाल डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने साहित्यकारों को किया प्रोत्साहित BIG BREAKING:: वाल्मीकि जयंती पर सीएम धामी ने दिया समरसता और मानवता का संदेश BIG BREAKING:: कुंभ-2027 के लिए ₹492 करोड़ की मंजूरी, उत्तराखंड में विकास कार्यों को रफ्तार; 178 पुनर्वास प्रभावित परिवारों के लिए ₹132.43 करोड़ के प्रतिकर को भी हरी झंडी BIG BREAKING:: पिथौरागढ़ को ₹284 करोड़ की 67 विकास योजनाओं की सौगात, CM धामी ने खोला घोषणाओं का पिटारा; सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार को मिलेगी नई रफ्तार! BIG BREAKING:: पत्रकारों के कल्याण को धामी सरकार का सहारा, 4 दिवंगत पत्रकारों के परिजनों को ₹20 लाख की सहायता और 4 वरिष्ठ पत्रकारों को मिलेगी ₹8 हजार मासिक पेंशन
Home » संदेश » BIG BREAKING:: कुमाऊं द्वार महोत्सव में सीएम धामी का बड़ा संदेश, बोले—देवभूमि की संस्कृति, पहचान और जनहित से समझौता नहीं करेगी सरकार

BIG BREAKING:: कुमाऊं द्वार महोत्सव में सीएम धामी का बड़ा संदेश, बोले—देवभूमि की संस्कृति, पहचान और जनहित से समझौता नहीं करेगी सरकार

(शहजाद अली हरिद्वार)मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी आज हल्द्वानी में आयोजित ‘कुमाऊं द्वार महोत्सव’ में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने महोत्सव में उपस्थित लोगों का स्वागत एवं अभिनंदन किया तथा उत्तराखण्ड की समृद्ध लोक संस्कृति, परंपराओं और लोक कलाओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए आयोजकों के प्रयासों की सराहना की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हल्द्वानी कुमाऊं का प्रवेश द्वार होने के साथ ही पर्वतीय समाज के लिए विशेष महत्व रखता है। यह क्षेत्र कुमाऊं की सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक जीवनशैली और लोक कलाओं की विशिष्ट पहचान को व्यापक मंच प्रदान करता है। महोत्सव में बड़ी संख्या में लोगों की उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि प्रदेशवासी अपनी सांस्कृतिक जड़ों और परंपराओं से गहराई से जुड़े हुए हैं।

उन्होंने ‘वैदेही कल्चरल एजुकेशन एंड आर्ट फाउंडेशन’ के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि संस्था लोकगायन और लोकनृत्य के माध्यम से विशेष रूप से युवा पीढ़ी को उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि लोक कलाकार अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रदेश की संस्कृति और परंपराओं को नई पहचान देने के साथ ही इन्हें देश-दुनिया तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड की लोक संस्कृति अत्यंत समृद्ध और विविधतापूर्ण है। यहां के लोकगीतों और लोकनृत्यों में पर्वतीय जीवन, प्राकृतिक सौंदर्य, ऋतु परिवर्तन, लोक आस्थाओं और गौरवशाली इतिहास की झलक देखने को मिलती है। छोलिया नृत्य, झोड़ा, चांचरी, बरदा नाटी और न्योली जैसी लोक विधाएं प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को संजोए हुए हैं। इसी प्रकार बेड़ा गीत, मांगल गीत और चैती गीत जैसी पारंपरिक गायन शैलियां उत्तराखण्ड के सामाजिक एवं सांस्कृतिक जीवन का अभिन्न अंग हैं।

उन्होंने कहा कि ढोल, दमाऊ, तुर्री, भंकोरा और रणसिंहा जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्र उत्तराखण्ड की लोक संस्कृति को विशिष्ट पहचान प्रदान करते हैं। इनकी धुनों में पहाड़ के जनजीवन, लोक आस्थाओं और परंपराओं की झलक मिलती है। डिजिटल तकनीक और सोशल मीडिया के विस्तार से उत्तराखण्ड का लोक संगीत प्रदेश की सीमाओं से बाहर निकलकर देश-विदेश में पहचान बना रहा है।

ALSO READ  "द न्यू इंडिया इंश्योरेंस कंपनी में योग और आरोग्य का महाकुंभ, डॉ. रुचिता उपाध्याय ने कर्मचारियों को सिखाए तनावमुक्त, स्वस्थ और सफल जीवन के गुर; योग से कार्यक्षमता, मानसिक संतुलन और आपसी समन्वय बढ़ाने का दिया संदेश"

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में उत्तराखण्ड के हित में अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए हैं। राज्य सरकार ने प्रदेश के भविष्य, जनहित और देवभूमि की विशिष्ट पहचान को ध्यान में रखते हुए समान नागरिक संहिता लागू करने, सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून बनाने, दंगारोधी कानून लागू करने और सशक्त भू-कानून की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने देवभूमि की सांस्कृतिक पहचान की रक्षा के साथ-साथ युवाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए भी महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। नकल माफिया पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से सख्त नकल विरोधी कानून लागू किया गया है। इसके परिणामस्वरूप भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड के हित में बड़े और आवश्यक निर्णय लेने से सरकार पीछे नहीं हटेगी। उनके अनुसार, प्रदेश का हित सत्ता से, जनहित राजनीति से और राष्ट्रहित वोटबैंक की राजनीति से ऊपर है।

उन्होंने उत्तराखण्ड राज्य आंदोलन के दौरान हुए रामपुर तिराहा गोलीकांड का उल्लेख करते हुए कहा कि राज्य आंदोलनकारियों के संघर्ष और बलिदान को प्रदेश की जनता आज भी याद करती है। राज्य आंदोलन के दौरान आंदोलनकारियों ने अनेक कठिनाइयों का सामना किया और उत्तराखण्ड राज्य के निर्माण के लिए संघर्ष किया। ऐसे ऐतिहासिक संदर्भों के बीच प्रदेश के लोगों के सम्मान से जुड़ी टिप्पणियां और भी संवेदनशील हो जाती हैं।

मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार श्री अजीत डोभाल का उल्लेख करते हुए कहा कि देश की सुरक्षा के लिए समर्पित व्यक्तित्वों के संबंध में राजनीतिक बयान देते समय राष्ट्रहित और सार्वजनिक जीवन की मर्यादा का ध्यान रखा जाना चाहिए।

ALSO READ  “हर घर नल–हर घर जल का ऐतिहासिक संकल्प साकार: जमालपुर कलां में जल अर्पण दिवस बना विकास और जल संरक्षण का महापर्व, सांसद त्रिवेंद्र सिंह रावत व विधायक अनुपमा रावत की मौजूदगी में गूंजा ‘जल है तो कल है’ का संदेश”

उन्होंने अंकिता भंडारी प्रकरण का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी बेटी को न्याय दिलाना समाज और व्यवस्था की गंभीर जिम्मेदारी है। इस संवेदनशील मामले में न्यायिक प्रक्रिया, तथ्यों और प्रमाणों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने प्रकरण में न्यायालय द्वारा दोषियों को सुनाई गई सजा और जमानत याचिकाओं से संबंधित न्यायिक कार्यवाही का उल्लेख करते हुए कहा कि कानून के अनुसार चलने वाली प्रक्रिया का सम्मान किया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बहन अंकिता को न्याय मिलना सर्वोपरि है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी संवेदनशील मामले को राजनीतिक लाभ का माध्यम बनाने के बजाय तथ्यों के आधार पर संवाद किया जाना चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

[democracy id="1"]

Our Visitor

5 9 7 4 5 2
Users Today : 276
Users Yesterday : 693
[democracy id="1"]

Our Visitor

5 9 7 4 5 2
Users Today : 276
Users Yesterday : 693