न्यूज़ फ्लैश
BIG BREAKING:: हिमालयी आपदाओं से निपटने में AI बनेगा बड़ा हथियार, जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच सतत विकास का खाका तैयार करने पर जोर BIG BREAKING:: बर्नीगाड़ को धामी की बड़ी सौगात, ₹217 करोड़ के विकास कार्यों का तोहफा, डिग्री कॉलेज शुरू और मिनी स्टेडियम की घोषणा BIG BREAKING:: डिग्री कॉलेजों के निर्माण में देरी पर मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन सख्त, हर जिले में बनेंगे कंप्यूटर आधारित प्रतियोगी परीक्षा केंद्र! BIG BREAKING:: मदन कौशिक ने छात्राओं को दिया स्वच्छता का संदेश, ज्वालापुर कन्या इंटर कॉलेज को सोलर हैंडपंप और मंच शेड की सौगात BIG BREAKING:: हाथियों के आतंक से फसलें बर्बाद, विधायक आदेश चौहान ने किया निरीक्षण, किसानों को मुआवजा और सुरक्षा के दिए सख्त निर्देश BIG BREAKING:: धामी ने 63 मेधावी सितारों और 6 प्रधानाचार्यों को किया सम्मानित, बोले—यही हैं उत्तराखंड के उज्ज्वल भविष्य की मजबूत नींव!
Home » निर्देश » BIG BREAKING:ग्लेशियर झीलों से लेकर नदियों तक ‘हाई अलर्ट’ पर धामी सरकार, मदन कौशिक ने दिए 24×7 निगरानी और त्वरित कार्रवाई के कड़े निर्देश

BIG BREAKING:ग्लेशियर झीलों से लेकर नदियों तक ‘हाई अलर्ट’ पर धामी सरकार, मदन कौशिक ने दिए 24×7 निगरानी और त्वरित कार्रवाई के कड़े निर्देश

(शहजाद अली हरिद्वार)देहरादून। राज्य में स्थित ग्लेशियर झीलों से संभावित खतरे को देखते हुए मा0 आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री श्री मदन कौशिक ने ग्लेशियर झीलों की निगरानी एवं जोखिम न्यूनीकरण के लिए विश्वभर में उपलब्ध अत्याधुनिक तकनीक को अपनाने के निर्देश दिए हैं। रविवार को उन्होंने राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (एसईओसी) पहुंचकर उत्तराखण्ड में स्थित ग्लेशियर झीलों की स्थिति तथा संभावित जोखिम की विस्तृत जानकारी ली।मंत्री ने कहा कि उत्तराखण्ड भौगोलिक दृष्टि से संवेदनशील राज्य है और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को देखते हुए ग्लेशियर एवं ग्लेशियर झीलों की स्थिति में होने वाले बदलावों की वैज्ञानिक निगरानी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने निर्देश दिए कि ग्लेशियर झीलों की निरंतर एवं रियल टाइम मॉनिटरिंग के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाए।

ग्लेशियर झीलों के जलस्तर, आकार, जलभराव की स्थिति तथा उनमें होने वाले संभावित बदलावों पर लगातार नजर रखी जाए। इसके लिए सैटेलाइट इमेजरी, रिमोट सेंसिंग, ड्रोन, सेंसर आधारित निगरानी तथा अन्य आधुनिक तकनीकों की संभावनाओं का अध्ययन कर इन्हें आवश्यकता के अनुसार अपनाया जाए।

ALSO READ  "उत्तर प्रदेश में बर्ड फ्लू की पुष्टि के बाद देहरादून में अलर्ट मोड: डीएम सविन बंसल की सख्त निगरानी, जिंदा मुर्गे-अंडे-मांस पर रोक, 170 पोल्ट्री फार्म से रैंडम सैंपल जांच के आदेश"

मंत्री ने निर्देश दिए कि ग्लेशियर झीलों की निगरानी के लिए संबंधित विभागों, विशेषज्ञ संस्थानों एवं तकनीकी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए। उन्होंने कहा कि जहां आवश्यक हो वहां अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित किए जाएं, ताकि किसी भी असामान्य स्थिति का समय रहते पता लगाकर संभावित प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को पहले से सतर्क किया जा सके।मा0 मंत्री श्री मदन कौशिक ने बैठक में प्रदेश में लगातार हो रही वर्षा तथा बारिश के कारण उत्पन्न परिस्थितियों की भी विस्तृत समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि जनजीवन की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी संभावित आपदा से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सभी विभाग पूर्ण समन्वय के साथ 24×7 अलर्ट मोड पर कार्य करें। उन्होंने राज्यभर में वर्षा की स्थिति, नदियों के जलस्तर, बंद सड़कों, भूस्खलन से प्रभावित क्षेत्रों, राहत एवं बचाव कार्यों, विद्युत एवं पेयजल आपूर्ति, संचार व्यवस्था तथा अन्य आवश्यक सेवाओं की विस्तृत जानकारी ली।

ALSO READ  हरिद्वार पुलिस की अभिभावकों से अपील: बच्चों की सुरक्षा के लिए करें स्कूल बस ड्राइवर और कंडक्टर से नियमित बातचीत, सतर्कता ही सुरक्षित भविष्य की गारंटी

विभिन्न जनपदों में हुई वर्षा, संभावित मौसम पूर्वानुमान तथाu आगामी दिनों की तैयारियों की समीक्षा करते हुए उन्होंने निर्देश दिए कि प्रत्येक स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जाए और किसी भी आपात परिस्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।उन्होंने राज्य आपातकालीन परिचालनy केंद्र को सभी जनपदों के साथ निरंतर समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बंद सड़कों को प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र खोला जाए तथा भूस्खलन संभावित एवं संवेदनशील स्थानों पर पर्याप्त मशीनरी पहले से तैनात रखी जाए। जिन स्थानों पर भूस्खलन अथवा मार्ग अवरुद्ध होने की संभावना अधिक रहती है, वहां पहले से पर्याप्त संख्या में जेसीबी, पोकलैंड मशीनें, आवश्यक उपकरण एवं तकनीकी दल तैनात किए जाएं, ताकि मार्ग अवरुद्ध होने की स्थिति में तत्काल यातायात बहाल किया जा सके।

ALSO READ  सीडीओ आकांक्षा कोण्डे की नवाचार पर नजर: ग्रामोत्थान रीप परियोजना की गहन समीक्षा, अधिकारियों को जमीनी सत्यापन कर विस्तृत रिपोर्ट देने के निर्देश

जलभराव वाले क्षेत्रों में प्रभावी जलनिकासी की व्यवस्था सुनिश्चित करने के साथ-साथ पंप एवं अन्य आवश्यक उपकरण पर्याप्त संख्या में उपलब्ध रखने के निर्देश भी दिए गए। उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ पूरी सतर्कता एवं संवेदनशीलता से कार्य करने को कहा, ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में तत्काल और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। कहा कि बिजली, पेयजल एवं संचार सेवाओं की बहाली सर्वोच्च प्राथमिकता पर की जाए। यदि कहीं भी ये सेवाएं प्रभावित होती हैं तो अतिरिक्त टीमें तत्काल भेजी जाएं और वैकल्पिक व्यवस्थाएं लागू कर आमजन को आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।उन्होंने निर्देश दिए कि सभी जिलों में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, पुलिस, स्वास्थ्य, लोक निर्माण, विद्युत, पेयजल, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति सहित सभी संबंधित विभाग पूर्ण समन्वय के साथ कार्य करें। दूरस्थ एवं संवेदनशील क्षेत्रों में खाद्यान्न, दवाइयों, ईंधन तथा अन्य आवश्यक वस्तुओं का पर्याप्त भंडारण पहले से सुनिश्चित किया जाए, ताकि सड़क बंद होने की स्थिति में स्थानीय नागरिकों को किसी प्रकार की कठिनाई का सामना न करना पड़े।

ALSO READ  साहिल बिष्ट हत्याकांड पर सख़्त हुए CM धामी, हरियाणा CM सैनी से की कड़क बात – बोले, अपराधी बचेंगे नहीं, परिवार को मिलेगा पूरा न्याय

बैठक में मा0 उपाध्यक्ष राज्य आपदा प्रबंधन सलाहकार समिति विनय रुहेला, उपाध्यक्ष ले. कर्नल (अ.प्रा.) रघुवीर सिंह भण्डारी, सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रियान्वयन डीआईजी राजकुमार नेगी, जेसीईओ दिनेश कुमार पुनेठा, यूएसडीएमए के विशेषज्ञ डॉ. पूजा राणा, रोहित कुमार, सुश्री प्रतिभा पुरोहित, मोहित माथुर आदि उपस्थित रहे।

यात्रा संचालन मौसम एवं मार्ग की स्थिति के आधार पर हो

मंत्री ने निर्देश दिए कि मौसम की वास्तविक स्थिति को ध्यान में रखते हुए ही यात्रा का संचालन किया जाए। यदि अत्यधिक वर्षा अथवा मार्ग अवरुद्ध होने जैसी परिस्थितियां उत्पन्न होती हैं तो यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रोककर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं तथा परिस्थितियां सामान्य होने के बाद ही उन्हें आगे भेजा जाए।

नदियों के जलस्तर पर 24 घंटे निगरानी के निर्देश

मंत्री ने नदियों के जलस्तर पर चैबीसों घंटे निगरानी बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नदी तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को लगातार जागरूक किया जाए तथा खतरे की आशंका होने पर उन्हें समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि डैम एवं बैराजों से पानी छोड़े जाने की स्थिति में डाउनस्ट्रीम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को पूर्व सूचना देकर सतर्क किया जाए। आवश्यकता पड़ने पर सीमावर्ती राज्यों को भी समय रहते अलर्ट किया जाए, ताकि किसी भी संभावित जोखिम को न्यूनतम किया जा सके।

वैकल्पिक संचार व्यवस्था हर समय तैयार रहे

मंत्री ने कहा कि यदि भारी वर्षा अथवा भूस्खलन के कारण किसी क्षेत्र में संचार व्यवस्था बाधित होती है तो वैकल्पिक संचार प्रणाली तत्काल सक्रिय की जाए। उन्होंने दूरस्थ एवं दुर्गम क्षेत्रों में वैकल्पिक संचार व्यवस्था को और मजबूत करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा के कारण मोबाइल अथवा अन्य संचार सेवाएं बाधित होने की स्थिति में तत्काल वैकल्पिक संचार माध्यम उपलब्ध होने चाहिए, ताकि राहत एवं बचाव कार्यों में किसी प्रकार की बाधा न आए।गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों एवं गंभीर रोगियों की विशेष निगरानी

मंत्री ने गर्भवती महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों तथा गंभीर बीमारियों से पीड़ित व्यक्तियों की विशेष निगरानी के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि संवेदनशील क्षेत्रों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं को आवश्यकता के अनुसार समय रहते सुरक्षित स्थानों अथवा चिकित्सा सुविधाओं से युक्त स्थानों पर पहुंचाया जाए। जहां आवश्यकता हो वहां हेलीकॉप्टर सेवा भी उपलब्ध कराई जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी परिस्थिति में चिकित्सा सहायता के अभाव में जनहानि नहीं होनी चाहिए।

डेंगू की रोकथाम के लिए युद्धस्तर पर अभियान के निर्देश

मंत्री ने प्रदेश में डेंगू की रोकथाम की भी समीक्षा की। उन्होंने इसे राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल बताते हुए सभी नगर निगमों, नगर पालिकाओं, नगर पंचायतों तथा ग्राम पंचायतों को युद्धस्तर पर अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जलभराव वाले सभी स्थानों की तत्काल पहचान कर वहां पानी की निकासी सुनिश्चित की जाए तथा नियमित फॉगिंग, एंटी लार्वा छिड़काव और विशेष स्वच्छता अभियान चलाया जाए। सभी जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में डेंगू जांच किट, पर्याप्त दवाइयां, रक्त की उपलब्धता, बेड तथा चिकित्सा कर्मियों की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

[democracy id="1"]

Our Visitor

5 8 9 6 1 7
Users Today : 642
Users Yesterday : 496
[democracy id="1"]

Our Visitor

5 8 9 6 1 7
Users Today : 642
Users Yesterday : 496