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“लक्सर में विधायक निधि घोटाले का बड़ा खुलासा: कागजों में बनी सड़क, जांच में निकली 35.50 मीटर गायब; सीडीओ की सख्ती से अधिकारियों में मचा हड़कंप”

(शहजाद अली हरिद्वार)हरिद्वार, 07 जुलाई। हरिद्वार जनपद के लक्सर विधानसभा क्षेत्र में विधायक निधि से कराए गए सड़क निर्माण कार्य में वित्तीय अनियमितता का बड़ा मामला सामने आया है।

मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र की पहल पर कराई गई संयुक्त स्थलीय जांच में शिकायत सही पाए जाने के बाद संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

जांच में यह सामने आया कि जिस सड़क को सरकारी अभिलेखों में स्वीकृत और पूर्ण दर्शाया गया था, वह निर्धारित स्थान पर बनी ही नहीं, जबकि माप पुस्तिका और वास्तविक निर्माण में भी बड़ा अंतर मिला है। मामले को गंभीर मानते हुए तत्कालीन और वर्तमान जिम्मेदार अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।

शिकायत के बाद गठित हुई जांच टीम

जानकारी के अनुसार ग्राम दरगाहपुर निवासी कपिल कुमार पुत्र रामशरण ने 23 जून 2025 को मुख्य विकास अधिकारी कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि विधायक निधि से चन्द्रपाल सैनी के घर से राहुल कुमार सैनी के घर तक सीसी सड़क निर्माण स्वीकृत हुआ था, लेकिन सड़क का निर्माण किए बिना ही कागजों में कार्य पूर्ण दिखाकर सरकारी धनराशि का दुरुपयोग कर लिया गया।

शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र ने 4 जून 2026 को संयुक्त जांच टीम गठित की। टीम में जिला युवा कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल अधिकारी तथा जिला ग्राम्य विकास अभिकरण के सहायक अभियंता अनिल जैन को शामिल किया गया। टीम ने 30 जून 2026 को अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट प्रस्तुत की।

जांच में शिकायत सही मिली

संयुक्त टीम की स्थलीय जांच में शिकायतकर्ता के आरोप सही पाए गए। जांच के दौरान स्पष्ट हुआ कि जिस स्थान पर सीसी सड़क निर्माण स्वीकृत था, वहां कोई सड़क बनाई ही नहीं गई। हालांकि ग्रामीणों ने बताया कि सड़क का निर्माण दूसरी दिशा में कराया गया है, जो स्वीकृत स्थल से अलग है।

इस तथ्य ने कार्यदायी संस्था और संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया कि स्वीकृत कार्यस्थल और वास्तविक निर्माण स्थल अलग-अलग पाए गए।

35.50 मीटर का अंतर बना जांच का सबसे बड़ा आधार

जांच के दौरान सबसे बड़ा खुलासा सड़क की लंबाई को लेकर हुआ। सरकारी अभिलेखों और माप पुस्तिका (एमबी) में दो निर्माण कार्यों की कुल लंबाई 205.50 मीटर दर्ज की गई थी, जबकि मौके पर संयुक्त रूप से दोनों सड़कों की पैमाइश कराने पर वास्तविक लंबाई केवल 170 मीटर मिली।

यानी सरकारी रिकॉर्ड और जमीनी हकीकत के बीच पूरे 35.50 मीटर का अंतर पाया गया। जांच अधिकारियों ने इसे गंभीर वित्तीय अनियमितता का संकेत माना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार का अंतर निर्माण कार्य की गुणवत्ता और भुगतान प्रक्रिया दोनों पर सवाल खड़े करता है।

सीडीओ ने दिखाई सख्ती

मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र ने जांच रिपोर्ट मिलने के बाद मामले में सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए निर्देश दिए हैं कि वे सभी अभिलेखीय साक्ष्यों के साथ अपना स्पष्टीकरण तत्काल प्रस्तुत करें।

सीडीओ ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ आवश्यक कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।

इन अधिकारियों को जारी हुआ नोटिस

मामले में तत्कालीन एवं वर्तमान जिम्मेदार अधिकारियों को नोटिस जारी किया गया है। इनमें तत्कालीन प्रभारी खंड विकास अधिकारी लक्सर एवं वर्तमान प्रभारी बीडीओ नारसन पवन सिंह सैनी, तत्कालीन अपर सहायक अभियंता लक्सर एवं वर्तमान सहायक अभियंता ग्रामीण निर्माण विभाग गोपेश्वर चमोली संदीप कुमार तथा तत्कालीन लेखाकार लक्सर एवं वर्तमान लेखाकार विकास खंड खानपुर राजीव कुमार त्रिपाठी शामिल हैं।

इन सभी अधिकारियों से जांच रिपोर्ट में दर्ज बिंदुओं पर अभिलेखीय साक्ष्यों सहित जवाब मांगा गया है।

कार्रवाई के संकेत, बढ़ सकती है जांच

मुख्य विकास अधिकारी कार्यालय की ओर से जारी नोटिस में साफ कहा गया है कि यदि समय पर जवाब प्राप्त नहीं हुआ तो यह माना जाएगा कि संबंधित अधिकारियों को अपने बचाव में कुछ नहीं कहना है। ऐसी स्थिति में उनके विरुद्ध विभागीय दंडात्मक कार्रवाई के साथ अन्य कानूनी प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।

इस मामले के सामने आने के बाद विधायक निधि से कराए गए अन्य विकास कार्यों की भी जांच की मांग उठने लगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ी तो कई और अनियमितताएं उजागर हो सकती हैं। फिलहाल पूरे मामले पर प्रशासन की कार्रवाई और संबंधित अधिकारियों के जवाब पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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