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“चेतना का महाकुंभ बना शांतिकुंज: 51 दिवसीय अनुष्ठान ने मानवता को दिया साधना-सेवा-समन्वय का महामंत्र, राज्यपाल बोले—यह समापन नहीं, युग परिवर्तन का शुभारंभ”

(शहजाद अली हरिद्वार)हरिद्वार। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने शनिवार को हरिद्वार में शांतिकुंज द्वारा आयोजित अखंड ज्योति शताब्दी समारोह के समापन में बतौर मुख्य अतिथि प्रतिभाग किया। इस कार्यक्रम में केन्द्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान भी विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि यह मात्र एक आयोजन ही नहीं बल्कि युग परिवर्तन का शुभारंभ है। उन्होंने कहा कि भले ही इसे समापन समारोह कहा जा रहा हो, किंतु वास्तव में यह एक नए युग का शुभारंभ है। यह युग चेतना का महाकुंभ है, जिसने व्यक्ति निर्माण, समाज निर्माण और राष्ट्र निर्माण की नई यात्रा को गति दी है। उन्होंने कहा कि यह ऐतिहासिक क्षण अपने आप में अद्वितीय है और सेवा, समर्पण, साधना एवं प्रज्ञा का वह संदेश देता है, जो संपूर्ण मानवता के लिए प्रेरणास्रोत है। राज्यपाल ने कहा कि इस 51 दिवसीय अनुष्ठान ने पूरी मानवता को साधना, सेवा और समन्वय का संदेश दिया है। यह केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मिक एवं नैतिक पुनर्निर्माण का संकल्प है, जिसे प्रत्येक नागरिक को अपने जीवन में आत्मसात करना होगा।राज्यपाल ने कहा कि गायत्री परिवार ने विश्वभर में सेवा और संस्कार का जो विशाल कार्य किया है, वह युग परिवर्तन की दिशा में एक सशक्त आधार बन चुका है। 80 से अधिक देशों में फैला यह आध्यात्मिक आंदोलन, हजारों केंद्रों और करोड़ों अनुयायियों के माध्यम से राष्ट्र निर्माण का संदेश दे रहा है।राज्यपाल ने शांतिकुंज को केवल आश्रम नहीं, बल्कि युगतीर्थ और आध्यात्मिक प्रयोगशाला बताते हुए कहा कि यहाँ साधना, प्रशिक्षण और सेवा के माध्यम से श्रेष्ठ नागरिक और श्रेष्ठ मानव का निर्माण होता है। उन्होंने वर्तमान नेतृत्व में हो रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि गुरुदेव की विचारधारा को समकालीन संदर्भों से जोड़कर आगे बढ़ाया जा रहा है। केन्द्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि गायत्री परिवार कोई साधारण संस्था नहीं है, बल्कि यह संस्कृति की सरिता, संस्कारों का सागर और अध्यात्म की आलौकिक आभा है, जो संपूर्ण विश्व को सनातन मूल्यों का दिग्दर्शन करा रही है। उन्होंने कहा कि अखंड ज्योति साधारण प्रकाश नहीं है, बल्कि यह ऐसी ज्योति है जो बाहर से अधिक भीतर प्रकाशित होती है। यह बुद्धि को विवेक से, कर्म को धर्म से तथा जीवात्मा को परमात्मा से जोड़ने का कार्य करती है। उन्होंने कहा कि यह ज्योति निरंतर प्रज्वलित है।शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि संपूर्ण विश्व अशांति, अनिश्चितता और संघर्ष के दौर से गुजर रहा है। व्यापार को हथियार बनाया जा रहा है और शक्ति के बल पर वर्चस्व स्थापित करने की प्रवृत्तियाँ बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में भारतीय संस्कृति, सनातन मूल्य और गायत्री परिवार ही विश्व को शांति और सद्भाव की दिशा में ले जाने में सक्षम हैं। समारोह के दलनायक डॉ चिन्मय पण्ड्या ने इस अवसर को “सौभाग्य की त्रिवेणी” बताते हुए माननीय राज्यपाल के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की तथा समस्त गायत्री साधकों का आभार प्रकट किया। दलनायक डॉ. पण्ड्या ने कहा कि आज आध्यात्मिकता को सोशल मीडिया के ‘लाइक्स’ से आँका जा रहा है, जबकि सच्ची साधना चमत्कार नहीं, परिष्कार का मार्ग है। गुरु अनेक मिल सकते हैं, पर पिता समान गुरु, वर्षों की प्रतीक्षा के बाद मिलते हैं। उन्होंने कहा कि प्रकाश के लिए आँखें खोलनी पड़ती हैं और जिसने भगवान को दिया है, वह कभी खाली हाथ नहीं रहता। अंत में उन्होंने जीवन में ग्रहणशीलता विकसित करने का आह्वान करते हुए साधना और सेवा को सार्थक बनाने का संदेश दिया।इस अवसर पर राज्य मंत्री विनय रोहिला, दुर्गा शंकर मिश्रा,जिलाधिकारी मयूर दीक्षित,वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रमेंद्र सिंह डोभाल, अपर जिलाधिकारी पी आर चौहान सहित विभिन्न देशों एवं प्रदेशों से आए शांतिकुंज के अनुयाई मौजूद रहें

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