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“स्वस्थ उत्तराखंड का नया आयाम: मातृ-शिशु स्वास्थ्य से लेकर टीबी उन्मूलन तक, डॉ. धन सिंह रावत के नेतृत्व में राज्य बना स्वास्थ्य सुधार का आदर्श मॉडल”

(शहजाद अली हरिद्वार)देहरादून। राज्य स्थापना के बाद प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार एवं सुदृढ़ीकरण की दिशा में बड़ी प्रगति हुई है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के ठोस क्रियान्वयन व मॉनिटिरिंग का नतीजा है कि स्थानीय स्तर पर आम लोगों को उच्च गुणवत्तायुक्त स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया की जा रही है। आज उत्तराखंड मातृ-शिशु स्वास्थ्य सुधार, पोषण, टीकाकरण, संस्थागत प्रवस, रक्त संचरण सेवाओं और जन-जागरूकता के क्षेत्र में सशक्त बनकर उभरा है।

मातृ मृत्यु अनुपात में उल्लेखनीय कमी

स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच आम लोगों तक होने से उत्तराखंड ने कई क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपब्धियां हासिल की है। राज्य में पिछले कुछ वर्षों में मातृ मृत्यु अनुपात में 12.5 प्रतिशत की गिरावट आई है, एस.आर.एस. 2021-23 रिपोर्ट के अनुसार एमएमआर घटकर 91 प्रति लाख जीवित जन्म हो गया है। जो स्वास्थ्य सेवाओं के सुधार का बड़ा प्रमाण है। इसी प्रकार सैंपल रजिस्ट्रेशन सर्वे 2023 के अनुसार राज्य की नवजात मृत्यु दर 14 प्रति हजार जीवित जन्म, शिशु मृत्यु दर 20 और पांच वर्ष से कम आयु की मृत्यु दर 23 प्रति हजार जीवित जन्म है। जो पूर्व की तुलना में कमी को दर्शाती है।

संस्थागत प्रसव को मिला बढ़ावा

प्रदेश में विभिन्न जन-जागरूकता अभियानों, आशा एवं एएनएम कार्यकत्रियों के सहयोग से गर्भवती महिलाओं को संस्थागत प्रसव के लिये प्रेरित किया गया। जिसके फलस्वरूप वर्तमान में प्रदेश में 95 फीसदी प्रसव संस्थागत कराये जा रहे हैं। इसके साथ गर्भवती महिलाओं को कई सुविधाएं भी दी जा रही है। जिसमें खुशियों की सवारी योजना भी शामिल है।

मातृ स्वास्थ्य को सशक्त बनाने के लिये माह फरवरी 2025 में पल्स एनीमिया अभियान के तहत कुल 57 हजार से अधिक गर्भवती महिलाओं की एनीमिया जांच की गई। जबकि ‘स्वस्थ नारी सशक्त परिवार अभियान’ के तहत हजारों महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच की गई।

चिकित्सा के धाम बने आरोग्य मंदिर

राज्य में कांप्रेहिन्सिव प्राइमरी केयर कार्यक्रम के तहत सभी 13 जनपदों में 2059 आयुष्मान आरोग्य मंदिर संचालित किये जा रहे हैं। जहां पर प्रतिवर्ष लगभग 34 लाख से अधिक लाभार्थियों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है।

आम लोगों ने उठाया स्वास्थ्य अभियानों का लाभ

राज्य में संचालित विभिन्न स्वास्थ्य अभियानों का लाभ आम लोग बखूबी उठा रहे हैं। विगत 03 वर्षों में 30 आयु वर्ग एवं इससे अधिक आयु के 28.80 लाख लाभार्थियों की उच्च रक्तचाप एवं शुगर की जांच आरोग्य मंदिरों की गई। इसके अलावा 28.4 लाख लाभार्थियों के मुख कैंसर, 13.1 लाख महिलाओं के स्तन कैंसर की जांच भी की गई। जबकि वर्तमान वित्तीय वर्ष में माह सितम्बर तक 10 लाख लाभार्थियों की हेल्थ स्क्रीनिंग कराई गई।

मजबूत हुई रक्त संचरण सेवा

प्रदेश में रक्त संचरण सेवा को खासी मजबूती मिली है। प्रदेश सभी जनपदों में रक्त कोषों की स्थापना की गई है। जिससे आपात स्थिति में लोगों को आसानी रक्त संबंधी समस्या से न जूझना पड़े ।वर्तमान में राज्य में 67 रक्तकोष स्थापित किये जा चुके हैं। इसके अलावा समय-समय पर रक्तदान शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें आम लोगों के द्वारा बड़ी मात्रा में स्वेच्छा से रक्तदान किया जा रहा है। इसके साथ ही लोगों से ऑनलाइन प्लेटफार्म पर भी पंजीकरण कराया जा रहा है।

टीबी उन्मूलन में अग्रणी प्रदेश

उत्तराखंड टीबी उन्मूलन के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी राज्य है। भारत सरकार द्वारा वर्ष 2025 हेतु दिये गये 28 हजार के लक्ष्य के सापेक्ष राज्य ने माह दिसम्बर 2024 तक कुल 29319 (105 प्रतिशत) एवं माह जुलाई 2025 तक दिये 16333 लक्ष्य के सापेक्ष 18400 (113 प्रतिशत) टीबी रोगी खोजे गये। इसके साथ ही प्रदेश्ज्ञ में कुल 17421 निःक्षय मित्र बनाये गये।

सिकल उन्मूलन मिशन के तहत राज्य में द्वारा 153200 के लक्ष्य के सापेक्ष कुल 153367 लाभार्थियों की स्क्रीनिंग पूरी की जा चुकी है।

प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। मिशन के माध्यम से राज्य ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, संस्थागत प्रसव, रोग नियंत्रण और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की। उत्तराखंड निरंतर स्वास्थ्य सूचकांकों में बेहतर प्रदर्शन कर रहा है और स्वास्थ नागरिक-समृद्ध राज्य के संकल्प को साकार करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

डॉ. धन सिंह रावत, स्वास्थ्य मंत्री, उत्तराखंड।

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