(शहजाद अली हरिद्वार)हरिद्वार के बहादराबाद विकासखंड स्थित जिला सभागार में सोमवार को एक ऐसा आयोजन हुआ जिसने कई जरूरतमंद और असहाय महिलाओं की जिंदगी में नई उम्मीद की किरण जगा दी।
आईटीसी मिशन सुनहरा कल और बंधन संस्था के संयुक्त प्रयास से आयोजित इस कार्यक्रम में 50 अल्ट्रा पुअर (अत्यंत गरीब) महिलाओं को स्वरोजगार किट वितरित की गई। इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना, उनकी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करना और उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने की राह दिखाना है।
जिला प्रशासन की मौजूदगी ने बढ़ाया उत्साह
कार्यक्रम में जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी मीरा रावत और ग्रामोत्थान रीप परियोजना प्रबंधक डॉ. संजय सक्सेना ने संयुक्त रूप से स्वरोजगार किट वितरित कीं।
जिला स्तर के अधिकारियों की मौजूदगी ने न केवल महिलाओं का उत्साह बढ़ाया बल्कि इस पहल की गंभीरता और महत्व को भी दर्शाया।
जिलाधिकारी ने कहा कि सरकारी योजनाओं के साथ-साथ जब निजी संस्थाएं समाज की मुख्यधारा से वंचित वर्गों के लिए इस तरह की पहल करती हैं तो उसका प्रभाव बहुत गहरा होता है। यह प्रयास प्रशासन और समाजिक संस्थाओं के बीच तालमेल का भी प्रतीक है।
स्वरोजगार किट से आत्मनिर्भरता की ओर कदम
लाभार्थी महिलाओं को सिलाई मशीनें, कॉस्मेटिक सामग्री और किराना दुकान चलाने के लिए आवश्यक सामग्री प्रदान की गई। इसका उद्देश्य यह था कि महिलाएं अपने कौशल और रुचि के अनुसार छोटा व्यवसाय शुरू कर सकें और अपने परिवार की आर्थिक मदद कर सकें।
उदाहरण के लिए, जिन महिलाओं को सिलाई का अनुभव है, उन्हें सिलाई मशीनें दी गईं ताकि वे कपड़ों की सिलाई-बुनाई का काम कर सकें। वहीं, जिनकी रुचि छोटे व्यापार में है, उन्हें कॉस्मेटिक व किराना सामग्री उपलब्ध कराई गई, जिससे वे अपने मोहल्ले या गांव में छोटी दुकान खोलकर आजीविका कमा सकें।
अल्ट्रा पुअर मॉडल का प्रभाव
आईटीसी समर्थित संस्था बंधन कोनागर अब तक 2100 अल्ट्रा पुअर महिलाओं को आजीविका संवर्धन हेतु सहयोग प्रदान कर चुकी है। “अल्ट्रा पुअर मॉडल” विशेष रूप से उन महिलाओं के लिए तैयार किया गया है
जिनके पास कमाने वाला कोई सदस्य नहीं है या जो सामाजिक-आर्थिक दृष्टि से अत्यंत पिछड़ी हुई हैं। इनमें अधिकांश विधवा, दिव्यांग, परित्यक्त या अकेली महिलाएं हैं।
इस मॉडल का उद्देश्य केवल सहायता प्रदान करना नहीं है, बल्कि इन महिलाओं को स्थायी आजीविका के साधन से जोड़ना है ताकि वे लंबे समय तक आत्मनिर्भर रह सकें।
डॉ. संजय सक्सेना का वक्तव्य
कार्यक्रम में बोलते हुए रीप परियोजना प्रबंधक डॉ. संजय सक्सेना ने कहा –
“आईटीसी का यह प्रयास सराहनीय है। महिलाओं को रीप के अल्ट्रा पुअर मॉडल से जोड़कर स्थायी आजीविका उपलब्ध कराई जा रही है। यह पहल न केवल महिलाओं की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही है बल्कि उनके आत्मसम्मान को भी पुनर्जीवित कर रही है।”
अन्य संस्थाओं की सहभागिता
इस अवसर पर आईटीसी मिशन सुनहरा कल से जुड़ी संस्थाएं – श्री भुवनेश्वरी महिला आश्रम, पीपीएचएफ, प्रथम और लोकमित्र ने सक्रिय सहभागिता निभाई। विभिन्न संस्थाओं की इस साझेदारी से यह स्पष्ट हुआ कि यदि समाज की कई इकाइयां मिलकर काम करें तो असंभव लगने वाले कार्य भी संभव हो सकते हैं।
आईटीसी लिमिटेड के मानव संसाधन प्रमुख मोहम्मद अल्ताफ हुसैन भी इस अवसर पर मौजूद रहे। उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र और सामाजिक संस्थाओं का दायित्व है कि वे समाज के सबसे कमजोर तबके को सशक्त बनाने के लिए प्रयास करें।
लाभार्थियों की खुशियां
कार्यक्रम का सबसे भावुक पक्ष था – लाभार्थियों की मुस्कान और उनकी उम्मीदों से भरी बातें।
तेलीवाला की रहने वाली रूकसाना ने कहा –
“इस कार्यक्रम से मुझे स्वरोजगार का साधन मिला है। अब मैं बच्चों की पढ़ाई आगे बढ़ा सकूंगी। संस्था एवं मिशन सुनहरा कल का आभार।”
इसी तरह कई अन्य महिलाओं ने भी खुशी जाहिर की। किसी ने कहा कि अब वह अपने घर के खर्च में सहयोग कर सकेगी तो किसी ने बताया कि सिलाई मशीन से वह अपने गांव में काम शुरू कर आत्मनिर्भर बनेगी।
महिलाओं के लिए नया रास्ता
मिशन सुनहरा कल की यह पहल महिलाओं को केवल आर्थिक मजबूती ही नहीं दे रही बल्कि उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ रही है। जब महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी होती हैं तो वे न केवल अपने परिवार का संबल बनती हैं बल्कि समाज में भी सकारात्मक बदलाव की वाहक बनती हैं।
हरिद्वार जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व वाले शहर में इस तरह की पहल का संदेश दूर-दूर तक जाता है। यहां की महिलाएं, जो अब तक गरीबी और बेबसी की चादर में लिपटी हुई थीं, अब आत्मनिर्भरता और आत्मसम्मान के नए अध्याय की ओर बढ़ रही हैं।
दीर्घकालिक प्रभाव
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि महिलाओं को इस तरह के छोटे व्यवसायों से जोड़ा जाए तो वे न केवल अपने परिवार को संभाल सकती हैं बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी शिक्षा और बेहतर जीवन का रास्ता दिखा सकती हैं। स्वरोजगार का साधन मिलने के बाद महिलाओं की निर्भरता घटेगी और वे सामाजिक रूप से भी अधिक सशक्त बनेंगी।
इसके अलावा, इस तरह की पहल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करती है क्योंकि छोटे स्तर पर ही सही, लेकिन नई दुकानों और सेवाओं की शुरुआत से स्थानीय बाजारों को भी बल मिलता है।
निष्कर्ष
हरिद्वार में हुआ यह आयोजन केवल किट वितरण का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह उन 50 महिलाओं की जिंदगी में नई शुरुआत का संदेश था। आईटीसी मिशन सुनहरा कल और बंधन संस्था का यह प्रयास दर्शाता है कि जब कॉर्पोरेट सेक्टर, सामाजिक संस्थाएं और प्रशासन मिलकर काम करते हैं तो समाज की तस्वीर बदल सकती है।
गरीबी, लाचारी और असहायता के अंधेरे में जी रहीं महिलाओं के लिए यह पहल सचमुच “सुनहरा कल” लेकर आई है। यह कार्यक्रम यह साबित करता है कि समाज में बदलाव केवल बड़ी योजनाओं से नहीं बल्कि छोटे-छोटे प्रयासों से भी लाया जा सकता है।













































