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“111 वर्षीय देवीलाल जी: अंग्रेज़ी हुकूमत से आज़ाद भारत तक ग्राम सुरक्षा के प्रहरी, पुलिस ने स्वतंत्रता दिवस पर किया सम्मानित — गुलामी के दौर की यादें साझा कर बोले, ‘आज़ादी की क़ीमत वही जानता है जिसने ग़ुलामी देखी हो’”

(शहजाद अली हरिद्वार)मंगलौर। यह उम्र केवल वर्षों का आंकड़ा नहीं, बल्कि समर्पण, निष्ठा और त्याग की अमूल्य गाथा है।
कुंवाहेड़ी गाँव कोतवाली मंगलौर, गुरुकुल नारसन चौकी क्षेत्र के निवासी देवीलाल ने कठिन परिस्थितियों, बदलते समय और सीमित संसाधनों के बावजूद अपनी जिम्मेदारियों को पूरी ईमानदारी और सतर्कता के साथ निभाया।
दिन हो या रात, वर्षा हो या धूप, उन्होंने ग्राम और पुलिस विभाग के बीच मजबूत सेतु का कार्य किया। उनकी प्रतिबद्धता ने ग्रामवासियों के मन में सुरक्षा और विश्वास की भावना को दृढ़ किया।

हालाँकि पुलिस विभाग द्वारा उनके पौत्र को ग्राम प्रहरी नियुक्त किया गया है, फिर भी श्री देवीलाल जी आज भी पुलिस विभाग से सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं।
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर, उन्हें पुलिस उपाधीक्षक मंगलौर विवेक कुमार प्रभारी निरीक्षक मंगलौर शांति कुमार गंगवार, चौकी प्रभारी नारसन श्री हेमदत्त भारद्वाज तथा समस्त पुलिस स्टाफ द्वारा सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर उन्होंने गुलामी के दौर के अनुभव साझा करते हुए भावुक होकर कहा-“आजादी की कीमत केवल वही जानते हैं जिन्होंने गुलामी का दौर देखा है।”
111 वर्ष की आयु में भी उनकी सेवा भावना हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उनका जीवन हमें सिखाता है कि सेवा की कोई उम्र नहीं होती-केवल इच्छा, लगन और जिम्मेदारी का भाव ही सच्ची प्रेरणा है।
हरिद्वार पुलिस विभाग और ग्रामवासी दोनों ही देवीलाल जी के योगदान के प्रति हृदय से कृतज्ञ हैं और उनके उत्तम स्वास्थ्य व दीर्घायु की कामना करते हैं।

 

 

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