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हरिद्वार के मनसा देवी मंदिर में मची भगदड़ से श्रद्धालुओं की मौत, मुख्यमंत्री ने जताया गहरा शोक, दिए मजिस्ट्रियल जांच और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा समीक्षा के निर्देश

(शहजाद अली हरिद्वार)हरिद्वार। उत्तराखंड के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल मनसा देवी मंदिर में रविवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच भगदड़ मच गई। हादसा सुबह करीब 9 बजे मंदिर के पैदल मार्ग पर हुआ, जब दर्शन को लेकर श्रद्धालुओं की आवाजाही अचानक असंतुलित हो गई। इस दर्दनाक घटना में अब तक 6 श्रद्धालुओं की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 28 अन्य घायल बताए जा रहे हैं।इस हृदयविदारक घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हादसे पर गहरा शोक जताते हुए मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट की है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार इस दुख की घड़ी में पीड़ित परिवारों के साथ खड़ी है। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये और घायलों को पचास-पचास हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।मुख्यमंत्री ने जिलाधिकारी हरिद्वार को निर्देशित किया है कि सभी पीड़ितों एवं उनके परिजनों को तुरंत राहत और सहायता मुहैया कराई जाए। साथ ही उन्होंने घटना की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश देते हुए स्पष्ट किया कि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास, विनोद कुमार सुमन को निर्देश दिए कि सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था, भीड़ प्रबंधन और मार्ग संचालन की समीक्षा की जाए।

घायलों को तुरंत उपचार, गंभीर मरीज एम्स रेफर

घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन व आपदा प्रबंधन विभाग की टीमें सक्रिय हो गईं। सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन ने बताया कि हादसे में घायल श्रद्धालुओं को त्वरित चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराई गई है। गंभीर रूप से घायल 5 श्रद्धालुओं को एम्स ऋषिकेश रेफर किया गया है, जबकि बाकी 23 घायलों का इलाज हरिद्वार जिला अस्पताल में चल रहा है।स्वास्थ्य विभाग की टीमें लगातार मौके पर मौजूद हैं और घायलों को हरसंभव सहायता दी जा रही है। मुख्यमंत्री खुद स्थिति की निगरानी कर रहे हैं और उन्हें लगातार रेस्क्यू और राहत कार्यों की जानकारी दी जा रही है।

राहत और बचाव कार्य में जुटी टीमें

जैसे ही घटना की खबर मिली, मौके पर एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, पुलिस, स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीमें पहुंच गईं और तुरंत रेस्क्यू अभियान शुरू कर दिया गया। गढ़वाल आयुक्त विनय शंकर पांडे, आईजी गढ़वाल राजीव स्वरूप, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, और एसएसपी प्रमेन्द्र डोबाल ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और घायलों का हालचाल जाना।आयुक्त गढ़वाल ने कहा कि सभी घायलों को बेहतर से बेहतर उपचार दिया जा रहा है और भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों इसके लिए हर स्तर पर योजनाएं बनाई जाएंगी।

हेल्पलाइन नंबर किए गए जारी

आपदा प्रबंधन सचिव ने हादसे के बाद तुरंत हेल्पलाइन नंबर जारी कर दिए ताकि श्रद्धालुओं के परिजन घटना की जानकारी प्राप्त कर सकें। ये नंबर हैं:

जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र, हरिद्वार
📞 01334-223999
📱 9068197350
📱 9528250926

राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र, देहरादून
📞 0135-2710334, 2710335
📱 8218867005
📱 9058441404

सचिव विनोद कुमार सुमन ने कहा कि इन नंबरों पर कॉल कर मृतकों, घायलों और राहत कार्यों से जुड़ी जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

अफवाहों से बचने की अपील

घटना के बाद कुछ भ्रामक जानकारियां सोशल मीडिया पर प्रसारित होने लगीं। इस पर आपदा प्रबंधन सचिव ने श्रद्धालुओं और आम जनता से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल प्रशासन द्वारा जारी सूचना पर ही भरोसा करें।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और राज्य सरकार की सभी एजेंसियां पूरी तत्परता से राहत व बचाव कार्यों में लगी हैं।

धार्मिक स्थलों की सुरक्षा पर विशेष जोर

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस हादसे को बेहद गंभीरता से लेते हुए सभी प्रमुख धार्मिक स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था की नए सिरे से समीक्षा करने का निर्देश दिया है। उन्होंने भीड़ नियंत्रण योजना, सीसीटीवी निगरानी प्रणाली, आपातकालीन निकासी व्यवस्था, दिशा संकेतक बोर्ड, और स्थानीय प्रशासनिक समन्वय को और अधिक प्रभावी बनाने की बात कही है।

यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि भीड़ प्रबंधन और आपात स्थिति से निपटने की रणनीतियों में और सुधार की जरूरत है, खासकर उन स्थलों पर जहां लाखों श्रद्धालु रोजाना पहुंचते हैं।

राज्य सरकार की संवेदनशीलता और तत्परता इस हादसे में स्पष्ट रूप से सामने आई है, लेकिन यह भी आवश्यक है कि भविष्य में ऐसे हादसों से बचाव के लिए स्थायी और मजबूत उपाय किए जाएं।

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