(शहजाद अली हरिद्वार)टिहरी गढ़वाल। ग्रामीण विकास में समाज के अंतिम व्यक्ति की जरूरतों को प्राथमिकता देने की अभिनव पहल के लिए टिहरी गढ़वाल जिले की ग्राम पंचायत विकास योजना (GPDP) को प्रतिष्ठित सिल्वर SKOCH अवॉर्ड से सम्मानित किया गया है।
पंचायत राज एवं ग्रामीण विकास के क्षेत्र में योजना निर्माण और प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मिली इस उपलब्धि से उत्तराखंड का मान बढ़ा है। सम्मान समारोह में जिला पंचायत राज अधिकारी डॉ. मोहम्मद मुस्तफा खान ने परियोजना के प्रतिनिधि के रूप में पुरस्कार प्राप्त किया।
अंतिम व्यक्ति की जरूरतों पर केंद्रित रही योजना

ग्राम पंचायत विकास योजना का उद्देश्य गांवों में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति की आवश्यकताओं को समझकर विकास की प्राथमिकताएं तय करना है। डॉ. मोहम्मद मुस्तफा खान ने सम्मान के लिए SKOCH ग्रुप का आभार जताते हुए कहा कि यह उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका प्रयास’ के विजन को धरातल पर उतारने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की पहचान है।
उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, पंचायती राज विभाग, केंद्र सरकार, विभागीय सचिव, निदेशक और पंचायती राज मंत्री के मार्गदर्शन को भी इस उपलब्धि का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि विकास योजनाओं का लाभ समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए और उसकी जरूरतों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
गवाली गांव की पहल बनी मिसाल

टिहरी गढ़वाल के बूढ़ा केदार क्षेत्र के निकट स्थित गवाली गांव में GPDP तैयार करने के दौरान अपनाई गई अभिनव कार्यप्रणाली इस उपलब्धि का प्रमुख उदाहरण बनी। योजना निर्माण के लिए गांव में महिला सभा और बाल सभा आयोजित की गईं, ताकि स्थानीय लोगों की समस्याओं और जरूरतों को सीधे समझा जा सके। इस दौरान जिलाधिकारी मयूर दीक्षित भी गांव पहुंचे थे।
महिला सभा में गांव की सबसे बुजुर्ग महिला को मंच पर स्थान देकर उनके सुझावों और आवश्यकताओं के आधार पर विकास योजनाएं तैयार करने की पहल की गई। इस कदम ने बुजुर्ग महिला को सम्मान देने के साथ ही विकास प्रक्रिया में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने का संदेश दिया।
अनाथ मेधावी बच्चे की पढ़ाई को भी मिली प्राथमिकता
बाल सभा के दौरान गांव के एक आर्थिक रूप से कमजोर मेधावी बच्चे की जरूरतों पर भी ध्यान दिया गया। पढ़ाई में अच्छा होने के बावजूद बच्चे के माता-पिता नहीं थे और आर्थिक स्थिति कमजोर थी। ऐसे में उसकी शिक्षा से जुड़ी आवश्यकताओं को समझते हुए मदद का भरोसा दिया गया। डॉ. खान के अनुसार, बच्चे की पढ़ाई की फीस जमा कराने में सहयोग का आश्वासन भी दिया गया।
जनभागीदारी से मजबूत होगा ग्रामीण विकास
GPDP के तहत ग्राम पंचायतें स्थानीय समस्याओं, उपलब्ध संसाधनों और ग्रामीणों की जरूरतों के आधार पर विकास योजनाएं तैयार करती हैं। टिहरी की इस पहल ने साबित किया कि महिला सभा और बाल सभा जैसे माध्यमों से बुजुर्गों, बच्चों और जरूरतमंद परिवारों की आवाज को योजनाओं में शामिल किया जा सकता है।
डॉ. मोहम्मद मुस्तफा खान ने इस सम्मान को पंचायती राज विभाग के अधिकारियों, कर्मचारियों और ग्रामीण विकास में योगदान देने वाले सभी लोगों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम बताया। टिहरी की यह उपलब्धि संदेश देती है कि वास्तविक विकास केवल सड़कों और भवनों तक सीमित नहीं, बल्कि समाज के सबसे कमजोर व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने से भी जुड़ा है।








































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