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“बारिश बनी चुनौती, डीएम का बड़ा वार! नदी किनारों पर सायरन-सीसीटीवी, खनन पर पूर्ण प्रतिबंध और अधिकारियों को सख्त चेतावनी”

(शहजाद अली हरिद्वार)देहरादून। जनपद में हुई वर्षा एवं संभावित आपदा की परिस्थितियों को देखते हुए जिलाधिकारी डॉ0 आशीष चौहान ने आज आपदा कंट्रोल रूम का निरीक्षण कर वहां की व्यवस्थाओं, संचार प्रणाली तथा आपदा से संबंधित तैयारियों का जायजा लिया।

निरीक्षण के दौरान उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि कंट्रोल रूम 24×7 सक्रिय रहे तथा किसी भी सूचना पर तत्काल प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।इसके उपरांत जिलाधिकारी ने एनआईसी सभागार से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों एवं उप जिलाधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। बैठक में सड़कों की स्थिति, पेयजल आपूर्ति, विद्युत व्यवस्था, जलभराव, आपदा प्रबंधन तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं की विस्तार से समीक्षा करते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

जिलाधिकारी ने सभी निर्माणदायी संस्थाओं को निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों के लिए खोदी गई सड़कों की तत्काल मरम्मत कर उन्हें सुरक्षित एवं सुगम बनाया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी सड़क पर गड्ढे या असुरक्षित स्थिति नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि विभागीय लापरवाही के कारण कोई दुर्घटना होती है तो संबंधित अधिकारी एवं संस्था की जिम्मेदारी तय करते हुए कठोर कार्रवाई की जाएगी।बैठक में जिलाधिकारी ने सभी उप जिलाधिकारियों को निर्देशित किया कि अपने-अपने क्षेत्रों में संचालित स्टोन क्रशरों की स्थिति का सत्यापन कर यह प्रमाणित करें कि वे वर्तमान में संचालित नहीं हैं तथा नदियों में किसी प्रकार की खनन गतिविधि नहीं हो रही है।

उन्होंने कहा कि 01 जुलाई से 30 सितंबर तक नदियों में किसी भी प्रकार की खनन गतिविधि पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगी। यदि इस अवधि में खनिज परिवहन करते हुए कोई वाहन पाया जाता है तो उसके विरुद्ध विधिक कार्रवाई करते हुए संबंधित वाहन को सीज करने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

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जिलाधिकारी ने नदी किनारे स्थित पर्यटन स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ करने के निर्देश देते हुए कहा कि वहां वार्निंग सायरन एवं सीसीटीवी कैमरे स्थापित किए जाएं, ताकि जलस्तर बढ़ने अथवा आपदा की स्थिति में पर्यटकों एवं स्थानीय लोगों को समय रहते सतर्क किया जा सके।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देशित करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाली ऐसी गर्भवती महिलाओं, जिनकी आगामी एक सप्ताह से दस दिनों के भीतर प्रसव संभावित है, उन्हें पूर्व से ही सुरक्षित स्थान अथवा अस्पताल के निकट ठहराने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, जिससे आपात स्थिति में किसी प्रकार की कठिनाई उत्पन्न न हो।

उन्होंने नगर निगम देहरादून, ऋषिकेश सहित सभी नगर निकायों को निर्देश दिए कि डेंगू एवं मलेरिया की रोकथाम के लिए नियमित फॉगिंग कराई जाए। साथ ही खराब स्ट्रीट लाइटों को तत्काल ठीक कराया जाए तथा जिन क्षेत्रों में स्ट्रीट लाइट उपलब्ध नहीं है, वहां सुरक्षा की दृष्टि से प्राथमिकता के आधार पर नई स्ट्रीट लाइटें स्थापित की जाएं।

जिलाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि नदी एवं नालों के किनारे रहने वाले लोगों का चिन्हीकरण कर उनकी सूची तैयार की जाए तथा भारी वर्षा अथवा बाढ़ की स्थिति में उन्हें सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने की पूर्व तैयारी सुनिश्चित की जाए।ज्ञातब्य है कि संभावित आपदा के दृष्टिगत जलभराव एवं नदी किनारे वाले ऐसे 29 क्षेत्र नगर निगम ने चिन्हित किए हैं, जिनमें 3700 परिवार एवं 900 घर है जिन्हे प्रशासन द्वारा मॉनिटर किया जा रहा है।

बैठक में बारिश के दौरान सड़क निर्माण कार्यों की प्राप्त शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने लोक निर्माण विभाग, पीएमजीएसवाई एवं राष्ट्रीय राजमार्ग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि वर्षा के दौरान मानकों के विपरीत सड़क निर्माण अथवा मरम्मत संबंधी शिकायत प्राप्त होने पर संबंधित अधिकारियों एवं कार्यदायी संस्थाओं के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाएगी।

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बैठक में अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) के. मिश्रा, अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) स्मृता परमार, उप जिलाधिकारी अपूर्वा सिंह, जिला सूचना विज्ञान अधिकारी अंकुश पांडेय तथा ई-डिस्ट्रिक्ट मैनेजर हरेंद्र शर्मा उपस्थित रहे। जबकि जनपद के समस्त उप जिलाधिकारी एवं विभिन्न विभागों के अधिकारी वर्चुअल माध्यम से बैठक में सम्मिलित हुए।

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