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“फूल देई-छम्मा देई की गूंज से महका लोक भवन: राज्यपाल गुरमीत सिंह बोले—उत्तराखण्ड की परंपराएं सिखाती हैं प्रकृति से प्रेम और खुशियाँ बाँटना”

(शहजाद अली हरिद्वार)देहरादून। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने रविवार को लोक भवन में उत्तराखण्ड के पारंपरिक लोकपर्व फूलदेई को हर्षोल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया।

लोक भवन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान पारंपरिक परिधान पहने बच्चों ने लोक भवन की देहरी पर फूल और चावल अर्पित किए तथा प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। बच्चों ने “फूल देई-छम्मा देई” जैसे पारंपरिक लोकगीत गाकर पर्व के महत्व को उजागर किया।

इस अवसर राज्यपाल ने बच्चों का आत्मीय स्वागत करते हुए उन्हें आशीर्वाद दिया और उपहार भेंट किए। उन्होंने कहा कि फूलदेई केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रेम और सद्भाव का संदेश देने वाली हमारी समृद्ध लोक परंपरा का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस पर्व के माध्यम से बच्चे घर-घर जाकर फूल अर्पित करते हुए सभी के सुख-समृद्धि की कामना करते हैं और समाज में खुशियाँ बाँटने का संदेश देते हैं।

राज्यपाल ने बच्चों द्वारा पारंपरिक वेशभूषा में इस पर्व को मनाने की सराहना करते हुए कहा कि नई पीढ़ी से हमें यह सीख मिलती है कि अपनी संस्कृति, परंपराओं और जड़ों से किस प्रकार जुड़े रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब बच्चे गर्व के साथ अपनी सांस्कृतिक पहचान को अपनाते हैं, तो यह हमारी धरोहर के संरक्षण का सशक्त संदेश देता है।

राज्यपाल ने कहा कि बच्चों के चेहरे की मुस्कान और उनका उत्साह यह दर्शाता है कि खुशियों का वास्तविक आनंद तभी है जब उन्हें सबके साथ साझा किया जाए। उन्होंने कहा कि बच्चों में ईश्वर का स्वरूप दिखाई देता है और उनके माध्यम से समाज में सकारात्मकता और प्रेम का संदेश प्रसारित होता है।

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उन्होंने पर्वतीय संस्कृति संरक्षण समिति के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि संस्था उत्तराखण्ड की समृद्ध संस्कृति, परंपराओं और मूल्यों के संरक्षण और प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। राज्यपाल ने कहा कि हमारी देवभूमि उत्तराखण्ड की परंपराएं और पूर्वजों की विरासत हमें प्रकृति से प्रेम आपसी सद्भाव और समाज में खुशियाँ बाँटने की प्रेरणा देती हैं।

इस अवसर पर प्रथम महिला श्रीमती गुरमीत कौर, पर्वतीय संस्कृति संरक्षण समिति के सचिव चंद्रशेखर जोशी एवं राकेश पंवार, श्रीमती मोनिका रावत, प्रियंका प्रधान, पूनम पंवार एवं संस्था के अन्य सदस्य उपस्थित रहे।

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